GST Rate Changes 2025: Two-Slab GST (5% & 18%) – Lower Taxes on Cars, EVs & Essentials
GST Rate Changes 2025: New Two-Slab Structure (5% & 18%), Reduced Taxes on Cars, EVs & Essentials Explained
नई GST दरों के बदलाव 2025 में काफी चर्चा में हैं, और अगर आप एक आम कारोबारी या कंज्यूमर हैं, तो ये आपके लिए अच्छी खबर हो सकती है। कल्पना कीजिए, अभी GST में 4 स्लैब्स (5%, 12%, 18%, 28%) हैं, जो कभी-कभी कंफ्यूजन पैदा करते हैं। लेकिन अब सरकार इसे सरल बनाने की कोशिश कर रही है – सिर्फ 2 मुख्य स्लैब्स: 5% और 18%। साथ में कुछ लग्जरी चीजों पर 40% स्पेशल रेट। इससे कार, EV, और रोजमर्रा की जरूरी चीजें सस्ती हो सकती हैं। मैं ये पोस्ट एक दोस्त की तरह लिख रहा हूं, सारी जानकारी साफ-साफ, स्टेप बाय स्टेप, ताकि आपको आसानी से समझ आए। सारी डिटेल्स लेटेस्ट सर्च रिजल्ट्स से ली गई हैं (जैसे GST काउंसिल मीटिंग्स और GoM रिपोर्ट्स)। चलिए, स्टार्ट करते हैं!
GST में क्या बदलाव आ रहा है? (नई टू-स्लैब स्ट्रक्चर)
अभी GST में 4 रेट्स हैं: 5% (जरूरी चीजों पर), 12% (कुछ सेवाओं पर), 18% (ज्यादातर सामान्य चीजों पर), और 28% (लग्जरी या हानिकारक आइटम्स पर)। लेकिन 20 अगस्त 2025 को ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (GoM) ने केंद्र सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी कि इसे 2 मुख्य स्लैब्स में बदल दिया जाए।
- 5% स्लैब: जरूरी और मेरिट गुड्स (जैसे खाने-पीने की चीजें, दवाइयां, और बेसिक सर्विसेज) पर। ये पहले जैसा ही रहेगा, ताकि आम आदमी पर बोझ न बढ़े।
- 18% स्लैब: ज्यादातर सामान्य चीजों और सेवाओं पर। 12% और 28% वाले आइटम्स को यहां मर्ज किया जाएगा।
- 40% स्पेशल स्लैब: लग्जरी, सिन गुड्स या हानिकारक आइटम्स (जैसे कार, तंबाकू, पान मसाला) पर। ये पहले 28% + सेस था, लेकिन अब डायरेक्ट 40% हो सकता है, ताकि राजस्व न घटे।
ये बदलाव GST को सरल बनाएगा – कम कागजी काम, कम कंफ्यूजन, और आसान कंप्लायंस। GoM ने इसे अप्रूव कर दिया है, लेकिन फाइनल डिसीजन सितंबर 2025 में GST काउंसिल की मीटिंग में होगा। अगर पास हुआ, तो 1 जनवरी 2026 से लागू हो सकता है (अभी कन्फर्म नहीं)।
कार, EVs और जरूरी चीजों पर टैक्स कम क्यों होंगे?
ये नई स्ट्रक्चर से कई चीजें सस्ती हो सकती हैं, क्योंकि 28% स्लैब हट रहा है। चलिए एक्जाम्पल्स देखते हैं:
- कार्स पर: अभी 28% + सेस (कुल 45% तक) है। नई स्ट्रक्चर में ये 18% या 40% (लग्जरी कार्स के लिए) पर आ सकता है। इससे कार प्राइस 5-10% कम हो सकती है – जैसे ₹10 लाख की कार पर ₹50,000-1 लाख की बचत।
- EVs (इलेक्ट्रिक व्हीकल्स) पर: EVs पर पहले से 5% है, लेकिन इस्तेमाल की गई EVs पर 18% हो गया है (16 जनवरी 2025 से)। नई स्ट्रक्चर में EVs को 5% में रखा जा सकता है, ताकि ग्रीन एनर्जी को प्रमोट किया जाए। इससे EV कार या स्कूटर सस्ते होंगे।
- एसेंशियल्स (जरूरी चीजें) पर: खाने की चीजें, दवाइयां, और बेसिक होम अप्लायंसेज पर 5% रहेगा। कुछ 12% वाली चीजें (जैसे बटर, चीज) 5% में शिफ्ट हो सकती हैं, जिससे घरेलू खर्च कम होगा।
- रियल एस्टेट पर असर: घर बनाने की लागत घट सकती है (कंस्ट्रक्शन सर्विसेज पर 18% रहेगा), जिससे नए घर 2-5% सस्ते हो सकते हैं। इससे डिमांड बढ़ेगी और मिडल क्लास को फायदा।
ये बदलाव आम आदमी, किसानों, और MSMEs को राहत देने के लिए हैं – सरकार का कहना है कि इससे इकोनॉमी बूस्ट होगी। लेकिन लग्जरी चीजों पर 40% से कुछ महंगी भी हो सकती हैं।
आम लोगों और कारोबारियों को क्या फायदे होंगे?
- आम आदमी के लिए: रोजमर्रा की चीजें सस्ती होंगी, जैसे कार खरीदना या घर बनाना। टैक्स सिस्टम सरल होने से इनवॉइस चेक करना आसान।
- कारोबारियों के लिए: कम स्लैब्स से कंप्लायंस आसान, कम ऑडिट, और इनपुट टैक्स क्रेडिट बेहतर। MSMEs को सब्सिडी और लोन में आसानी।
- इकोनॉमी पर असर: ज्यादा खरीदारी से ग्रोथ बढ़ेगी, लेकिन सरकार को राजस्व नुकसान का डर है – इसलिए 40% स्लैब रखा गया।
अगर आप कारोबारी हैं, तो इनवॉइस पर नई दरें मीटिंग के बाद की नोटिफिकेशन से लागू होंगी – अभी पुरानी दरें इस्तेमाल करें।